भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 क्या है?
भारतीय न्याय संहिता, 2023 भारत सरकार द्वारा लाया गया वह नया आपराधिक कानून है जो लगभग 160 वर्षों से लागू भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) को प्रतिस्थापित करता है। IPC ब्रिटिश शासन के दौरान बनाई गई थी, जिसका उद्देश्य शासन की सुविधा था, न कि नागरिकों को न्याय देना। स्वतंत्र भारत में समय के साथ यह आवश्यकता महसूस की गई कि आपराधिक कानून को संविधान, मानवाधिकारों और आधुनिक सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप बदला जाए।
IPC को बदलने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
IPC एक औपनिवेशिक कानून था, जिसमें कई ऐसे प्रावधान थे जो आज के लोकतांत्रिक और संवैधानिक भारत के अनुकूल नहीं माने जाते। तकनीक के विकास के साथ अपराधों की प्रकृति भी बदली है, जैसे साइबर अपराध, संगठित अपराध और डिजिटल धोखाधड़ी, जिनके लिए IPC में पर्याप्त और स्पष्ट प्रावधान नहीं थे।
- कानून का दंड-केंद्रित दृष्टिकोण
- पीड़ित के अधिकारों की उपेक्षा
- आधुनिक अपराधों की अपर्याप्त परिभाषा
इन सभी कारणों से एक नए, आधुनिक और न्याय-केंद्रित कानून की आवश्यकता उत्पन्न हुई, जिसका परिणाम भारतीय न्याय संहिता के रूप में सामने आया।
भारतीय न्याय संहिता 2023 की प्रमुख विशेषताएँ
- IPC की जगह BNS का प्रवर्तन
- दंड के साथ-साथ न्याय और सुधार पर जोर
- महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों पर कड़े प्रावधान
- साइबर एवं संगठित अपराधों की स्पष्ट परिभाषा
- पीड़ित की भूमिका को अधिक महत्व
BNS और IPC में मूल अंतर
IPC मुख्यतः अपराध और दंड पर केंद्रित थी, जबकि BNS का दृष्टिकोण अधिक व्यापक है। यह केवल अपराधी को दंडित करने तक सीमित नहीं, बल्कि पीड़ित को न्याय दिलाने और समाज में संतुलन स्थापित करने पर भी बल देती है। कुछ मामलों में सुधारात्मक दंड और वैकल्पिक उपायों को भी स्थान दिया गया है।
न्याय की अवधारणा में बदलाव
भारतीय न्याय संहिता का मूल उद्देश्य यह है कि कानून केवल भय का साधन न होकर न्याय का माध्यम बने। इसमें यह स्वीकार किया गया है कि हर अपराध का समाधान केवल कठोर सजा नहीं, बल्कि कभी-कभी सुधार और पुनर्वास भी हो सकता है। यह दृष्टिकोण भारतीय संविधान की भावना के अधिक निकट है।
🙋♂️ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
भारतीय न्याय संहिता 2023 क्या है?
यह IPC 1860 के स्थान पर लागू किया गया नया आपराधिक कानून है, जो आधुनिक भारत की आवश्यकताओं के अनुसार बनाया गया है।
क्या IPC पूरी तरह समाप्त कर दी गई है?
हाँ, BNS के लागू होने के बाद नए मामलों में IPC के बजाय भारतीय न्याय संहिता के प्रावधान लागू होंगे।
क्या BNS आम नागरिकों के लिए उपयोगी है?
हाँ, यह कानून नागरिकों के अधिकारों को मजबूत करता है और पीड़ित को न्याय प्रक्रिया में अधिक सशक्त बनाता है।
Disclaimer: यह लेख केवल शैक्षिक एवं विधिक जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह नहीं है।